पश्चिम बंगाल- जयनगर सीट पर किसका होगा कब्जा?, जातीय समीकरण हैं हावी

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नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल की जयनगर संसदीय सीट पर इस बार किसका कब्जा होगा यह तो 23 मई को पता चलेगा पर इस बार यहां जातिगत समीकरण को भुनाने ही होड़ लगी है। 1962 के बाद अस्तित्व में आई इस सीट पर शुरुआत से ही वामपंथी दलों के बीच मुकाबला रहा है। 1962 के चुनावों के बाद जब भी चुनाव हुए हैं, हमेशा वामपंथी दलों को ही जीत मिली है, लेकिन एक बार सत्तासीन तृणमूल कांग्रेस को भी इस सीट से जीत मिली है। 
2011 की जनगणना की रिपोर्ट के पन्नों को पलट कर देखा जाए तो इस संसदीय क्षेत्र की सीट की कुल आबादी 2239168 है जिनमें 86.07 फीसदी लोग गांवों में रहते हैं जबकि 13.93 फीसदी शहरी हैं। इनमें अनुसूचित जाति और जनजाति का अनुपात क्रमशः 38.14 और 3.21 फीसदी है। वहीं, बात कर निर्वाचन आयोग द्वारा 2014 के लोकसभा चुनावों के आंकड़ों पर की जाए, तो यहां 81.52 फीसदी मतदान हुए थे जबकि 2009 में यह आंकड़ा  80.08 फीसदी था। इसमें ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस, भाजपा, माकपा और कांग्रेस को क्रमशः 41.61 फीसदी, 9.52 फीसदी और 3.24 फीसदी वोट मिले थे।  दस साल से कांग्रेस के राज शासन के बाद 2014 में चली नरेंद्र मोदी की लहर ने भाजपा को बेशक देश के हर कोने में फायदा पहुंचाया हो, लेकिन पश्चिम बंगाल में मोदी मैजिक नहीं चला और एक बार फिर तृणमूल कांग्रेस ने बाजी मारी। हालांकि वक्त के साथ समीकरण में बदलाव हुआ है और इस बार भाजपा जनता पर पकड़ बनाने की पूरी कोशिश है, इसलिए जयनगर लोकसभा सीट का मुकाबला और भी ज्यादा दिलचस्प हो गया है। एक तरफ भाजपा सत्ता में आने के लिए बेताब है, तो दूसरी तरफ तृणमूल कांग्रेस के सामने अपनी पहचान और पकड़ दिखाने का इम्तिहान है।

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