लोस चुनाव : पिता-पुत्र की जीत तय ? लड़ाई मार्जिन की

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भोपाल । मध्यप्रदेश में 29 अप्रैल को 6 लोकसभा सीटों के साथ छिन्दवाड़ा विधानसभा सीट पर भी उपचुनाव होना है, प्रदेश की लोकसभा और विधानसभा की हाइप्रोफाइल सीट छिन्दवाड़ा से प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ और भाजपा के बंटी विवेक साहू मैदान में हैं। वहीं लोकसभा में कांग्रेस से नकुलनाथ और भाजपा से नत्थन शाह कवरेती के बीच मुकाबला है। भौगोलिक रुप से मप्र का सबसे बड़ा जिला छिंदवाड़ा प्राकृतिक सुंदरता और संसाधनों से भरपूर है। महाकौशल संभाग के सतपुडा की वादियों में बसा यह जिला आदिवासी बाहुल्य जिले के रुप में पहचाना जाता है। जिले में पर्य़टन के रुप में जहां विश्वविख्यात पातालकोट है, तो वहीं पर जामसांवली के चमत्कारिक हनुमान मंदिर की भी अपनी पहचान है।  क्षेत्रफल की दृष्टि से राज्य के कुल क्षेत्रफल का 2.66 फीसदी भाग जिले को कवर करता है। भौगोलिक क्षेत्रफल करीब 11815 वर्गकिलोमीटर में फैला हुआ है। राजनैतिक रुप में पूरे देश में समृद्द जिलो में पहचान रखने वाले इस जिले में 1 लोकसभा के अलावा 7 विधानसभाएं हैं। कांग्रेस के कद्दावर नेता कमलनाथ का यहां की राजनीति में पिछले 4 दशकों से कब्ज है। 13 तहसीलों में विभाजित जिले की जनसंख्या 2011 की जनगणना के अनुसार 2090922, साक्षारता का प्रतिशत 71.16 और लिंगानुपात 964 है और विकासदर 0.1307 है।
मूल रुप में गोंडी जिले के रुप में विकसित इस जिले में प्रकृति ने अपार भंडार दिए हैं जिसमें सतपुडा के जंगल के अलावा पूरे प्रदेश का एकमात्र जिला है। जिसमें 7 नदियों का उदगम स्थल है जिनमें पेंच, कन्हान, जाम, कुलबहरा, शक्कर, दुधिया और बोदरी, साथ ही जमीन के नीचे कोयला, मैग्नीज, डोलोमाइट, जस्ता, का अपार भंडार है। कहा जाता है कि जब 1500 ईसवी के आसपास गोंडवाना राज्य स्थापित हुआ, तो छिंदवाड़ा का देवगढ़ उसकी राजधानी हुआ करती थी। जिसका आज भी प्रमाण है। जिले में हिंदी,गोंडी और मराठी बोली का चलन है।
यूं तो छिंदवाड़ा को कुदरत ने वो सबकुछ दिया है। जो एक जिले विकसित करने के लिए काफी है। लोगों का मानना है कि जिले में गांवों की अपेक्षा नगर का विकास तो हुआ है। लेकिन अभी तक वह वहां नही पहुचा जिसका वो हकदार है। जिले में गर्मी के दिनों में पीने के पानी की आज भी बड़ी समस्या है। आज भी बड़ी संख्या में यहां के युवा शिक्षा और रोजगार के लिए महा नगरों की ओर ही देखते हैं। यहां पर कुछ पुराने कारखाने समय के साथ बंद हो गए हैं।

1.आज भी जिले की बड़ी आबादी फ्लोराइड वाला पानी पीती है। 
3. बेहतर शिक्षा के लिए बाहर पलायन,स्थानीय स्तर पर व्यवसायिक औऱ तकनीकी शिक्षा की जरुरत है
4. सब्जी और संतरे का हब लेकिन फूड प्रोसेंसिंग के लिए काफी काम किया जाना है। 
5. बाहरी कंपनियों को जिले की बेशकीमती जमीन दी गई। लेकिन स्थानीय लोगों को रोजगार के भटकना पड़ रहा है। 
6. सौंसर में सेज के लिए किसानों से हजारों एकड़ जमीन ली गई। लेकिन अबतक कोई काम नहीं हुआ,, पीड़ित किसान आज भी बदहाल हैं।
7. जिले में एक भी विश्वविद्याल नहीं,,पहले सागर विवि से संबंध था अब रानी दुर्गावती से जोड़ दिया गया है।
8.अदानी पावर प्लांट के नाम पर किसानों के जमीन ली गई लेकिन सात सालों में अबतक कंपनी ने कोई काम नहीं किया। अब बंद होने की कगार पर है।
9.कोयले की खदानों को निजी हाथो में दिया जा रहा है जिससे स्थानीय लोग बेरोजगार हो रहे हैं।
10. नगरनिगम बनाने के लिए 24 गांवो को शामिल किया गया। लेकिन 2 साल बाद भी उन गांवो की स्थिती में कोई विशेष सुधार नहीं हुआ है। 

छिन्दवाड़ा लोकसभा सीट कांग्रेस का गढ़ रही है। यहाँ पिछले 4 दशकों से इस सीट पर कांग्रेस के दिग्गज नेता कमलनाथ का ही कब्जा रहा है, इस बार कमलनाथ के बड़े बेटे नकुल नाथ को यहां से कांग्रेस ने टिकट दिया गया है। वहीं भाजपा ने पूर्व विधायक और आदिवासी नेता नत्थन शाह कवरेती पर भरोसा जताया है। यहां पर लोकसभा के साथ ही विधानसभा की छिन्दवाड़ा सीट के लिए भी उपचुनाव है। जिसमे कांग्रेस के दिग्गज नेता और प्रदेश के वर्तमान मुख्यमंत्री कमलनाथ पहली बार छिन्दवाड़ा से विधानसभा का चुनाव लड़ रहे हैं। उनकी जीत को लेकर सभी आश्वस्त हैं और वो खुद से ज़्यादा नकुलनाथ का ही प्रचार कर रहे हैं। वहीं भाजपा ने युवा नेता बंटी विवेक साहू को मैदान में उतारा है। यह उनका पहला चुनाव है। उन्हें उम्मीद है, कि जनता प्रदेश सरकार की वादाखिलाफी और राष्ट्रीय मुद्दों पर उनका साथ देगी।  छिन्दवाड़ा लोकसभा की चर्चा पुर देश में होती है कांग्रेस का गढ़ होनेके कारण यह सीट कांग्रेस काफी सुरक्षित मानती है, अब देखना होगा कि छिन्दवाड़ा की राजनीति का यह बदलाव यहां के विकास को किस तरह बढ़ाएगा। कमलनाथ अब मुख्यमंत्री है। नकुलनाथ केन्द्रीय राजनीति में होंगे। कमलनाथ के सम्पर्क का लाभ केन्द्र एवं राज्य दोनों से समान रुप से मिलेगा। कमलनाथ छिंदवाड़ा मॉडल को सारे देश एवं दुनिया के सामने रखने विशेष प्रयास कर रहे हैं। छिंदवाड़ा का मतदाता भी कमलनाथ के नेतृत्व में विश्वास करता है। इससे पिता-पुत्र की जीत तय है। लड़ाई अधिक से अधिक वोटों के जीतने की है। 

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