लोकपाल व सूचना का अधिकार कानून मात्र दिखावा

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भोपाल । सूचना का अधिकार कानून को लागू करने में अहम भूमिका निभाने वाले मजदूर किसान शक्ति संगठन के निखिल डे ने कहा कि लोकपाल व सूचना का अधिकार कानून जैसे सिर्फ दिखावे के ही रह गए है। बीते पांच सालों में देश में 75 आरटीआई कार्यकर्ताओं की हत्या की गई। श्री डे यहां लोकसभा चुनावों के मद्देनजर गांधी भवन में आयोजित जन सरोकार सम्मलेन में बोल रहे थे।सम्मेलन में चुनावों को लेकर विकास, सद्भाव, समानता और वर्तमान सरकार की उपलब्धियों को लेकर विचार विमर्श किया गया। सम्मेलन में उन्होंने यह भी कहा कि वीवीपैट के जरिए पर्चियों के आधार पर गणना होना चाहिए। यही चुनावों में विश्वसनीयता पर उठते सवालों का जबाव है। देश में सबसे बड़ा संकट यह है कि शिकायतों निवारण तंत्र और पारदर्शिता को खत्म करने की कोशिश की जा रही है। देश में शासन-प्रशासन को आईना दिखाने वाले आरटीआई कार्यकर्ताओं के लिए प्रोटेक्शन एक्ट पारित नहीं होना इसका ही एक उदाहरण है। 
    तीन संस्थाओं के द्वारा सूचना के अधिकार के तहत जानकारी में चौंकाने वाले तथ्य साझा किए गए। अजीम प्रेमजी विश्वविद्यालय के प्रोफेसर व सामाजिक कार्यकर्ता राजेंद्र ने बताया कि वर्ष 2016 से 2018 तक देश में 55 लाख पुरुषों की नौकरियां चली गई। महिलाओं की नौकरी जाने को लेकर अध्ययन नहीं किया गया। औसतन हर तीन में से दो शिक्षित युवा बेरोगजार है। सरकार मनरेगा में भी 90 प्रतिशत मजदूरी का भुगतान समय पर किए जाने का दावा करती है। जबकि केंद्र सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक 56 दिन देरी से मजदूरों को भुगतान किया जा रहा है। समाजसेवी व भारत ज्ञान विज्ञान समिति की आशा मिश्रा ने कहा कि यह चुनाव विचारधारा के लिए महत्वपूर्ण है। जो देश की दिशा व गति तय करेगा। उन्होंने कहा कि हम खुद तय करें कि सरकार ने हमारे लिए अब तक क्या किया। समीक्षा के बाद ही वोट तय करें।