कई महानगरों को रोशन करता है यहां का कोयला, पर यहीं फैला अंधेरा 

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बड़कागांव ।  झारखंड के कई क्षेत्र ऐसे हैं जहां से हर दिन करोड़ों का कोयला निकलता है। और इस कोयले से बनने वाली बिजली से कई महानगर रोशन भी होते हैं। ले‎किन चौंकाने वाली बात यह है ‎कि लगभग तीन ‎दिनों से इन क्षेत्रों में ही अंधेरा पसरा हुआ है। जी हां झारखंड के बड़कागांव प्रखंड में 36 घंटे से बिजली नहीं है। ‎जिसके चलते बड़कागांव, केरेडारी और टंडवा प्रखंड के कई गांवों के लोग परेशान हैं। यहां पर 13 मार्च के दोपहर में बिजली कट गयी थी। 15 मार्च की शाम तक बिजली नहीं आयी। सबसे बड़ी मुसीबत तो यहां के बच्चों की है जो  मैट्रिक और इंटर की परीक्षाएं  दे रहे हैं। ऐसे में विद्यार्थियों को परीक्षा की तैयारी करने में दिक्कतें आ रही हैं। बिजली विभाग के कनीय अभियंता ने बताया कि बड़कागांव के पंकरी बरवाडीह में अधिक लोड के कारण केबल का तार जल गया। इसलिए बिजली कट गयी। तार को जोड़ा जा रहा है। जल्द ही बिजली आपू‎‎र्ति  ‎फिर से शुरु कर दी जाएगी। वहीं, सूत्र बताते हैं कि कोयला कंपनियों में बिजली की खपत अधिक होने के कारण बार-बार 33,000 का केबल ही उड़ जाता है। बिजली सब-स्टेशन के कर्मचारियों की मानें, तो डेमोटांड़ से बड़कागांव विद्युत सबस्टेशन को 300 एम्पियर बिजली मिलती है। बड़कागांव विद्युत सबस्टेशन से बड़कागांव प्रखंड के 85, केरेडारी प्रखंड के 82 व टंडवा एवं सिमरिया के 50 गांवों में बिजली का वितरण किया जाता है।
बिजली का वितरण करने के लिए बड़कागांव विद्युत सबस्टेशन में चार फीडर, केरेडारी में चार और सिमरिया में दो फीडर हैं। इन सभी फीडरों को 300 एम्पियर में ही बिजली वितरण करना होता है, जबकि बड़कागांव विद्युत सबस्टेशन को हर 620 एम्पियर बिजली की आवश्यकता है। बता दें ‎कि बड़कागांव सबस्टेशन के अंतर्गत पांच फीडर बनाये गये हैं, जिसमें बड़कागांव, बादम, आंगो, नगड़ी एवं केरेडारी हैं। बड़कागांव फीडर से बड़कागांव, सांढ़, छपरेवा, दोकाटांड़, नापो, गोसाईबलिया, चोपदार बलिया, विश्रामपुर और  बरवनियां समेत 40 गांवों को बिजली सप्लाई की जाती है। आंगो फीडर को 120 या 125 एम्पियर बिजली दी जाती है। इससे चोरका, पडिरिया, सीरमा, छवाणियां, पगार, खैरातरी, कांडतरी, सोनपुरा, महुदी, अम्बटोला, पतरातू, देवगढ़, लोहरसा व उरेज स‎हित 30 गांवों को बिजली की आपूर्ति की जाती है। वहीं, नगड़ी फीडर को 150 या 160 एम्पियर बिजली की आपू‎र्ति की जाती है। इससे गर्रीकलां, सिकरी, महतिकरा, बारियातु, नावाडीह, उरुब देवरिया व चेपाकलां समेत 50 गांवों को बिजली सप्लाई होती है।
बिजली की किल्लत से परेशान बड़कागांव के लोगों में गुस्सा और आक्रोश देखा जा रहा है। लोगों का कहना है कि शहरी क्षेत्र होने के बाद भी बड़कागांव प्रखंड में बिजली की आपूर्ति चार से छह घंटे ही होती है। 40 साल से बिजली की आंख-मिचौली यहां पर जारी है। यहां से जाना वाला कोयला कई महानगरों को रोशन करता है लेकिन, सरकारी और विभागीय उदासीनता के कारण बिजली के लिए कोयला देने वाले बड़कागांव में अंधेरा ही फैला हुआ है। 

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