पबजी मोबाइल में फंसे बच्चों की पढाई हो रही प्रभावित

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नई दिल्ली ।मंडलीय मनोविज्ञान केंद्र के अध्ययन में पता चला है कि  ‘पबजी मोबाइल’  बच्चों की पढ़ाई प्रभावित कर रहा है। बच्चे स्कूल जाना बंद कर क्लास बंक कर रहे या होमवर्क छोड़ देते हैं। पैरेंट्स और बच्चों की काउंसिलिंग में पता चला है कि यह गेम खेलने वाले 90 फीसदी बच्चों ने स्कूल जाना ही बंद कर दिया। बचे हुए दस फीसदी शेड्यूल टाइमिंग में तो पढ़ते हैं लेकिन बाकी समय मोबाइल पर लगे रहते हैं। पिछले कई महीनों से अभिभावक मंडलीय मनोविज्ञान केंद्र पर फोन कर मदद मांग रहे थे। ज्यादातर की शिकायत थी कि उनके बच्चे का मन पढ़ाई में नहीं लग रहा है। बच्चा स्कूल नहीं जाने के बहाने खोजता है, किसी तरह चला भी गया तो लौटने के बाद मोबाइल में लग जाता है। शिकायतें बढ़ीं तो मंडलीय मनोविज्ञान केंद्र ने सैंपल सर्वे शुरू किया। इसके तहत 200 पैरेंट्स से बात की गई।100 अभिभावकों को बच्चों के साथ काउसिलिंग सेंटर बुलाया गया। जब उनसे बात की गई तो पता चला कि सभी पबजी खेलने के शौकीन हैं। अब हालत यह है कि गेम को छोड़ नहीं पा रहे हैं। मंडलीय मनोवैज्ञानिक डॉ एलके सिंह कहते हैं कि मोबाइल फोन को लेकर पैरेंट्स की शिकायतें आने लगीं तो उनका अध्ययन किया गया। यह बात सामने आई कि सबसे ज्यादा व्यसन (एडिक्शन) पबजी गेम के प्रति है। इससे पहले ब्लूव्हेल गेम के प्रति क्रेज बढ़ा था लेकिन उसकी प्रकृति दूसरी थी। इस पर रोक के बाद स्थिति बेहतर हो सकी। डॉ एलके सिंह के मुताबिक पबजी गेम नया नहीं है लेकिन इसके प्रति क्रेज अब काफी बढ़ गया है। पिछले छह महीने में अभिभावकों व अन्य के जब फोन आने शुरू हुए तो यह बात सामने आई कि गेम के प्रति बच्चों का रुझान इतना ज्यादा बढ़ रहा है कि वे स्कूल छोड़ने लगे हैं। मालूम हो कि पबजी वर्ष 2017 में लांच हुआ था। कुछ समय बाद ही एंड्रॉयड मोबाइल पर भी आ गया। इस ऑनलाइन गेम में सट्टे के लिए सबसे पहले रूम आईडी बनती है। रूम आईडी बनाने वाला ऑनलाइन प्लेयर सोशल मीडिया के जरिए लोगों को इनवाइट करता है। रूम इंट्री के लिए इनवाइट प्लेयर पेटीएम के जरिए निर्धारित रकम का भुगतान करता है। इसके बाद प्लेयर को रूम आईडी और पासवर्ड दिया जाता है। चार प्लेयर का स्क्वायड बनता है, जिसके बाद एक साथ 100 सदस्यीय 25 स्क्वायड टीम आईलैंड के वार जोन में उतरती हैं। विनर को पेटीएम के ही माध्यम से रूम आईडी बनाने वाला प्लेयर सट्टे की रकम का भुगतान करता है। जब बच्चों से बात की गई तो पता चला कि ज्यादातर मामले पबजी गेम से जुड़े हुए थे। सैंपल सर्वे में पता चला कि ज्यादातर बच्चे 8वीं से 12वीं के बीच पढ़ने वाले हैं। काउंसिलिंग के दौरान बच्चों ने माना कि वह पबजी गेम खेल रहे हैं। गेम में आगे का टारगेट उन्हें खेलने के लिए मजबूर करता है।